Namak ka Droga (Hindi)
Book Details
Author(s)Premchand
PublisherSai ePublications
ISBN / ASINB00JEGC0RC
ISBN-13978B00JEGC0R2
Sales Rank1,538,994
MarketplaceUnited States 🇺🇸
Description
जब नमक का नया विà¤à¤¾à¤— बना और ईशà¥à¤µà¤°à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¤à¥à¤¤ वसà¥à¤¤à¥ के वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° करने लगे। अनेक पà¥à¤°à¤•ार के छल-पà¥à¤°à¤ªà¤‚चों का सूतà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¤ हà¥à¤†, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सरà¥à¤µà¤¸à¤®à¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ पद छोड-छोडकर लोग इस विà¤à¤¾à¤— की बरकंदाजी करते थे। इसके दारोगा पद के लिठतो वकीलों का à¤à¥€ जी ललचाता था।
यह वह समय था जब à¤à¤‚गरेजी शिकà¥à¤·à¤¾ और ईसाई मत को लोग à¤à¤• ही वसà¥à¤¤à¥ समà¤à¤¤à¥‡ थे। फारसी का पà¥à¤°à¤¾à¤¬à¤²à¥à¤¯ था। पà¥à¤°à¥‡à¤® की कथाà¤à¤ और शृंगार रस के कावà¥à¤¯ पढकर फारसीदाठलोग सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š पदों पर नियà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाया करते थे।
मà¥à¤‚शी वंशीधर à¤à¥€ जà¥à¤²à¥‡à¤–ा की विरह-कथा समापà¥à¤¤ करके सीरी और फरहाद के पà¥à¤°à¥‡à¤®-वृतà¥à¤¤à¤¾à¤‚त को नल और नील की लडाई और अमेरिका के आविषà¥à¤•ार से अधिक महतà¥à¤µ की बातें समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ रोजगार की खोज में निकले।
उनके पिता à¤à¤• अनà¥à¤à¤µà¥€ पà¥à¤°à¥à¤· थे। समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ लगे, 'बेटा! घर की दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ देख रहे हो। ॠण के बोठसे दबे हà¥à¤ हैं। लडकियाठहैं, वे घास-फूस की तरह बढती चली जाती हैं। मैं कगारे पर का वृकà¥à¤· हो रहा हूà¤, न मालूम कब गिर पडूà¤! अब तà¥à¤®à¥à¤¹à¥€à¤‚ घर के मालिक-मà¥à¤–à¥à¤¤à¤¾à¤° हो।
'नौकरी में ओहदे की ओर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढावे और चादर पर रखनी चाहिà¤à¥¤ à¤à¤¸à¤¾ काम ढूà¤à¤¢à¤¨à¤¾ जहाठकà¥à¤› ऊपरी आय हो। मासिक वेतन तो पूरà¥à¤£à¤®à¤¾à¤¸à¥€ का चाà¤à¤¦ है, जो à¤à¤• दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लà¥à¤ªà¥à¤¤ हो जाता है। ऊपरी आय बहता हà¥à¤† सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है जिससे सदैव पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ बà¥à¤à¤¤à¥€ है। वेतन मनà¥à¤·à¥à¤¯ देता है, इसी से उसमें वृधà¥à¤¦à¤¿ नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईशà¥à¤µà¤° देता है, इसी से उसकी बरकत होती हैं, तà¥à¤® सà¥à¤µà¤¯à¤‚ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ हो, तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ समà¤à¤¾à¤Šà¤à¥¤
'इस विषय में विवेक की बडी आवशà¥à¤¯à¤•ता है। मनà¥à¤·à¥à¤¯ को देखो, उसकी आवशà¥à¤¯à¤•ता को देखो और अवसर को देखो, उसके उपरांत जो उचित समà¤à¥‹, करो। गरजवाले आदमी के साथ कठोरता करने में लाठही लाठहै। लेकिन बेगरज को दाà¤à¤µ पर पाना जरा कठिन है। इन बातों को निगाह में बाà¤à¤§ लो यह मेरी जनà¥à¤® à¤à¤° की कमाई है।
यह वह समय था जब à¤à¤‚गरेजी शिकà¥à¤·à¤¾ और ईसाई मत को लोग à¤à¤• ही वसà¥à¤¤à¥ समà¤à¤¤à¥‡ थे। फारसी का पà¥à¤°à¤¾à¤¬à¤²à¥à¤¯ था। पà¥à¤°à¥‡à¤® की कथाà¤à¤ और शृंगार रस के कावà¥à¤¯ पढकर फारसीदाठलोग सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š पदों पर नियà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाया करते थे।
मà¥à¤‚शी वंशीधर à¤à¥€ जà¥à¤²à¥‡à¤–ा की विरह-कथा समापà¥à¤¤ करके सीरी और फरहाद के पà¥à¤°à¥‡à¤®-वृतà¥à¤¤à¤¾à¤‚त को नल और नील की लडाई और अमेरिका के आविषà¥à¤•ार से अधिक महतà¥à¤µ की बातें समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ रोजगार की खोज में निकले।
उनके पिता à¤à¤• अनà¥à¤à¤µà¥€ पà¥à¤°à¥à¤· थे। समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ लगे, 'बेटा! घर की दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ देख रहे हो। ॠण के बोठसे दबे हà¥à¤ हैं। लडकियाठहैं, वे घास-फूस की तरह बढती चली जाती हैं। मैं कगारे पर का वृकà¥à¤· हो रहा हूà¤, न मालूम कब गिर पडूà¤! अब तà¥à¤®à¥à¤¹à¥€à¤‚ घर के मालिक-मà¥à¤–à¥à¤¤à¤¾à¤° हो।
'नौकरी में ओहदे की ओर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढावे और चादर पर रखनी चाहिà¤à¥¤ à¤à¤¸à¤¾ काम ढूà¤à¤¢à¤¨à¤¾ जहाठकà¥à¤› ऊपरी आय हो। मासिक वेतन तो पूरà¥à¤£à¤®à¤¾à¤¸à¥€ का चाà¤à¤¦ है, जो à¤à¤• दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लà¥à¤ªà¥à¤¤ हो जाता है। ऊपरी आय बहता हà¥à¤† सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है जिससे सदैव पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ बà¥à¤à¤¤à¥€ है। वेतन मनà¥à¤·à¥à¤¯ देता है, इसी से उसमें वृधà¥à¤¦à¤¿ नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईशà¥à¤µà¤° देता है, इसी से उसकी बरकत होती हैं, तà¥à¤® सà¥à¤µà¤¯à¤‚ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ हो, तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ समà¤à¤¾à¤Šà¤à¥¤
'इस विषय में विवेक की बडी आवशà¥à¤¯à¤•ता है। मनà¥à¤·à¥à¤¯ को देखो, उसकी आवशà¥à¤¯à¤•ता को देखो और अवसर को देखो, उसके उपरांत जो उचित समà¤à¥‹, करो। गरजवाले आदमी के साथ कठोरता करने में लाठही लाठहै। लेकिन बेगरज को दाà¤à¤µ पर पाना जरा कठिन है। इन बातों को निगाह में बाà¤à¤§ लो यह मेरी जनà¥à¤® à¤à¤° की कमाई है।









