Basere Se Dur (Hindi Edition)
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Book Details
Author(s)Harivansh Rai Bachchan
PublisherRajpal and Sons
ISBN / ASIN8170282853
ISBN-139788170282853
AvailabilityUsually ships in 24 hours
Sales Rank3,360,562
MarketplaceUnited States 🇺🇸
Description ▲
पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ हिनà¥à¤¦à¥€ कबि हरिवंशराय 'बचà¥à¤šà¤¨' की आतà¥à¤®à¤•था का पहला खंड, "कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥‚लूठकà¥à¤¯à¤¾ याद करूà¤" जब 1969 से पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤† तब हिनà¥à¤¦à¥€ साहितà¥à¤¯ में मानो हलचल मच गई । यह हलचल 1935 से पà¥à¤°à¤•ाशित "मधà¥à¤¶à¤¾à¤²à¤¾" से किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार कम नहीं थी l अनेक समकालीन लेखको ने इसे हिनà¥à¤¦à¥€ के इतिहास की à¤à¤¸à¥€ पहली घटना बताया जब अपने बारेमें इतनी इतनी बेबाकी से सब कà¥à¤› का देने का साहस किसी ने दिखाया । इसके बाद आतà¥à¤®à¤•था के आगामी खंडों की बेताबी से पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•à¥à¤·à¤¾ की जाने लगी और उन सà¤à¥€ का जोरदार सà¥à¤µà¤¾à¤—त होता रहा। पà¥à¤°à¤¥à¤® खंड " कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥‚लूठकà¥à¤¯à¤¾ याद करूठ" के बाद नीड़ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ फिरा, "बसेरे से दूर" और " 'दशदà¥à¤µà¤¾à¤° से 'सोपान' तक" लगà¤à¤— पंदà¥à¤°à¤¹ वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से इसके चार खंड पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤ ।
बचà¥à¤šà¤¨ की यह कृति आतà¥à¤®à¤•था साहितà¥à¤¯ की चरम परिणति है और इसकी गणना कालजयी रचनाओं में की जाती है ।