à¤à¤• रात
à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ अबोध यà¥à¤µà¤• की कहानी जो पहले अपने पà¥à¤°à¥‡à¤® को समठनहीं पाया और जब जाना-समà¤à¤¾ तो बहà¥à¤¤ देर हो चà¥à¤•ी थी। फिर à¤à¤• ही रात में उसका पूरा जीवन सारà¥à¤¥à¤• कैसे बन जाता है...?
समापà¥â€à¤¤à¤¿
पति अपनी पतà¥â€à¤¨à¥€ के पà¥à¤°à¥‡à¤® में आसकà¥â€à¤¤ है; पतà¥â€à¤¨à¥€ अनजान है या अबोध वह नहीं जानता... पर पतà¥â€à¤¨à¥€ का मन जीतने के लिये अटल है, आतà¥â€à¤®-संयमित है; वह अपने करà¥à¤¤à¥à¤¤à¤µà¥â€à¤¯ à¤à¤µà¤‚ अधिकार समà¤à¤¤à¤¾ है और दामà¥â€à¤ªà¤¤à¥â€à¤¯ जीवन की नैतिक मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€... कà¥â€à¤¯à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ à¤à¤• तरफा पà¥à¤°à¥‡à¤® सफल हो सकता है? à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ पातà¥à¤° की कहानी जिसकी मृत माठअपने पà¥à¤¤à¥à¤° के नैतिक मारà¥à¤— से विचलित होते ही उसके कवच का रूप धारण कर लेती है।