सà¥à¤à¤¦à¥à¤°à¤¾ कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ चौहान की कहानियाà¤-4 (Hindi Stories): Subhadra Kumari Chauhan Ki Kahania-4 (Hindi Stories)
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Book Details
PublisherBhartiya Sahitya Inc.
ISBN / ASINB00JUE7OSS
ISBN-13978B00JUE7OS1
Sales Rank99,999,999
MarketplaceUnited States 🇺🇸
Description ▲
उनकी कहानियाठà¤à¥€ नारी सà¥à¤µà¤¾à¤¤à¤‚तà¥à¤°à¥à¤¯ का नया उदà¥à¤˜à¥‹à¤· करती हैं। उनके जैसी उपेकà¥à¤·à¤¿à¤¤ कवयितà¥à¤°à¥€ के समगà¥à¤° मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन के लिठनया इतिहास लिखने की जरूरत है। सà¥à¤à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤•à¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ चौहान सिरà¥à¤« à¤à¤• कवयितà¥à¤°à¥€ ही नहीं थी, देश के सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ संगà¥à¤°à¤¾à¤® में à¤à¥€ उनका अमूलà¥à¤¯ योगदान रहा है। उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ के राजनैतिक, सामाजिक, सांसà¥à¤•ृति जीवन में सà¥à¤à¤¦à¥à¤°à¤¾ जी के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की गहरी छाप रही है। समाज की अनीतियों से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ जिस पीड़ा को वे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करना चाहती थीं उसकी अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का उचित माधà¥à¤¯à¤® गदà¥à¤¯ ही हो सकता था, अतः सà¥à¤à¤¦à¥à¤°à¤¾ जी ने कहानियाठलिखीं। उनकी कहानियों में देश-पà¥à¤°à¥‡à¤® के साथ-साथ समाज को, अपने वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित करने के लिठसंघरà¥à¤·à¤°à¤¤ नारी की पीड़ा और विदà¥à¤°à¥‹à¤¹ का सà¥à¤µà¤° मिलता है।