मैं न मानूठ(Hindi Novel): Main Naa Manu (Hindi Novel)
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Book Details
Author(s)गà¥à¤°à¥ दतà¥à¤¤, Guru Datt
PublisherBhartiya Sahitya Inc.
ISBN / ASINB00KAG8DF8
ISBN-13978B00KAG8DF8
Sales Rank1,411,375
MarketplaceUnited States 🇺🇸
Description ▲
अà¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨à¥€ का सिर नीचा होता है, परनà¥à¤¤à¥ इस संसार में à¤à¤¸à¥‡ लोग à¤à¥€ हैं जो सिर नीचा होने पर à¤à¥€, उसको नीचा नहीं मानते। à¤à¤¸à¥‡ लोगों के लिठही कहावत बनी है–‘रसà¥à¤¸à¥€ जल गई, पर बल नहीं टूटे’। इसका कारण मनà¥à¤·à¥à¤¯ की आदà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¤¾à¤‚त विवेक-शूनà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है। विवेक अपने चारों ओर घटने वाली घटनाओं के ठीक मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन का नाम है। मन के विकार हैं–काम, कà¥à¤°à¥‹à¤§, लोà¤, मोह तथा अहंकार। जब इन विकारों के कारण बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ मलिन हो जाती है तो वह ठीक को गलत और गलत को ठीक समà¤à¤¨à¥‡ लगती है। इसको विवेक-शूनà¥à¤¯à¤¤à¤¾ कहते हैं। मन के विकारों में अहंकार सबसे अनà¥à¤¤à¤¿à¤® और सबसे अधिक बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿ करने वाला है। अहंकारवश मनà¥à¤·à¥à¤¯ ठोकर खाकर गिर पड़ता है, बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿ हो जाती है। बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿ हो जाने से वह नहीं मानता कि वह गिर पड़ा है अथवा उसका अà¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ था। वह अपनी à¤à¥‚ल सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं करता और अनà¥à¤¤ तक कहता रहता है–मैं न मानूà¤, मैं न मानूà¤à¥¤