बिखरे मोती (Hindi Stories): Bikhare Moti (Hindi Stories)
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Book Details
PublisherBhartiya Sahitya Inc.
ISBN / ASINB00M0W6SHU
ISBN-13978B00M0W6SH4
Sales Rank1,664,677
MarketplaceUnited States 🇺🇸
Description ▲
मैं ये ‘बिखरे मोती’ आज पाठकों के सामने उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ करती हूà¤; ये सब à¤à¤• ही सीप से नहीं निकले हैं। रूढ़ियों और सामाजिक बनà¥à¤§à¤¨à¥‹à¤‚ की शिलाओं पर अनेक निरपराध आतà¥à¤®à¤¾à¤à¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ ही चूर-चूर हो रही हैं। उनके हृदय-बिनà¥à¤¦à¥ जहाà¤-तहाठमोतियों के समान बिखरे पड़े हैं। मैंने तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ केवल बटोरने का ही पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ किया है। मेरे इस पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ में कला का लोठहै और अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ कà¥à¤·à¥‹à¤ à¤à¥€à¥¤ सà¤à¥€ मानवों के हृदय à¤à¤•-से हैं वे पीड़ा से दà¥à¤ƒà¤–ित, अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° से रà¥à¤·à¥à¤Ÿ और करà¥à¤£à¤¾ से दà¥à¤°à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं। दà¥à¤–, रोष और करà¥à¤£à¤¾, किसके हृदय में नहीं है ? इसीलिठये कहानियाठमेरी न होने पर à¤à¥€ मेरी हैं, आपकी न होने पर à¤à¥€ आपकी और किसी विशेष की न होने पर à¤à¥€ सबकी हैं। समाज और गृहसà¥à¤¥à¥€ के à¤à¥€à¤¤à¤° जो घात-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤˜à¤¾à¤¤ निरंतर होते रहते हैं उनकी यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤§à¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤ मातà¥à¤° हैं; उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आप ने सà¥à¤¨à¤¾ होगा। मैंने कोई नई बात नहीं लिखी है; केवल उन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤§à¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अपने à¤à¤¾à¤µà¥à¤•-हृदय की तनà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के साथ मिलाकर ताल सà¥à¤µà¤° में बैठाने का ही पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ किया है।