परिणीता (Hindi Novel): Parineeta (Hindi Novel)
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Book Details
Author(s)शरतचनà¥à¤¦à¥à¤° चटà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯, Sharatchandra Chattopadhyay
PublisherBhartiya Sahitya Inc.
ISBN / ASINB00NH9X80K
ISBN-13978B00NH9X805
MarketplaceFrance 🇫🇷
Description ▲
शरतचनà¥à¤¦à¥à¤° के उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ में ‘परिणीता’ à¤à¤• अनूठी पà¥à¤°à¤£à¤¯ कहानी है, जिसमें दहेज पà¥à¤°à¤¥à¤¾ की à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¤à¤¾ का चितà¥à¤°à¤£ किया गया है। गà¥à¤°à¥‚चरण बैंक में कà¥à¤²à¤°à¥à¤• थे। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जब पाà¤à¤šà¤µà¥€ कनà¥à¤¯à¤¾ होने का संवाद मिला तो à¤à¤• गहरी सी ठंड़ी साà¤à¤¸ लेने की ताकत à¤à¥€ उनमें नहीं रही। पिछले वरà¥à¤· दूसरी कनà¥à¤¯à¤¾ के विवाह में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पैतृक मकान तक गिरवी रखना पड़ा था। अनाथ à¤à¤¾à¤¨à¤œà¥€ ललिता उनके साथ रहती थी जिसकी आयॠतेरह वरà¥à¤· हो गई थी, किनà¥à¤¤à¥ उसके विवाह में खरà¥à¤š करने के लिठगà¥à¤°à¥‚चरण के पास तेरह पैसे तक नहीं थे। गà¥à¤°à¥‚चरण के घर के बगल में नवीनचनà¥à¤¦à¥à¤° राय रहते थे। उनका छोटा बेटा शेखर गà¥à¤°à¥‚चरण के परिवार से बहà¥à¤¤ आतà¥à¤®à¥€à¤¯à¤¤à¤¾ रखता था। ललिता आठबरस की थी तà¤à¥€ से शेखर à¤à¥ˆà¤¯à¤¾ के पास आती-जाती थी। शेखर से ललिता ने पढ़ना-लिखना सीखा तथा उनका हर काम वह बड़े जतन से करती थी। शेखर से पूछे बगैर ललिता का कोई काम नहीं होता था। शेखर के रूपये ललिता जब तब निःसंकोच काम में लेती रहती थी। बचपन से ललिता को शेखर का जो अपार सà¥à¤¨à¥‡à¤¹ मिलता रहा, वही बड़े होने पर à¤à¤•निषà¥à¤ पà¥à¤°à¥‡à¤® में बदल जाता है। शेखर को यह दà¥à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¨à¥à¤¤à¤¾ बराबर रहती थी कि ललिता से बà¥à¤¯à¤¾à¤¹ करने के लिठमाता-पिता समà¥à¤®à¤¤à¤¿ नहीं देंगे ओर उसका अनà¥à¤¯à¤¤à¥à¤° विवाह हो जाà¤à¤—ा। à¤à¤• दिन जब अनायास ललिता उसके गले में माला डाल देती है तो शेखर वापिस उसे माला पहना कर अपनी परिणीता बना लेता है, जो किसी को मालूम नहीं होता।