मानसरोवर - à¤à¤¾à¤— 2
कà¥à¤¸à¥à¤®
खà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ फौजदार
वेशà¥à¤¯à¤¾
चमतà¥à¤•ार
मोटर के छींटे
कैदी
मिस पदà¥à¤®à¤¾
विदà¥à¤°à¥‹à¤¹à¥€
कà¥à¤¤à¥à¤¸à¤¾
दो बैलों की कथा
रियासत का दीवान
मà¥à¤«à¥à¤¤ का यश
बासी à¤à¤¾à¤¤ में खà¥à¤¦à¤¾ का साà¤à¤¾
दूध का दाम
बालक
जीवन का शाप
डामà¥à¤² का कैदी
नेउर
गृह-नीति
कानूनी कà¥à¤®à¤¾à¤°
लॉटरी
जादू
नया विवाह
शूदà¥à¤°
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साल-à¤à¤° की बात है, à¤à¤• दिन शाम को हवा खाने जा रहा था कि महाशय नवीन से मà¥à¤²à¤¾à¥˜à¤¾à¤¤ हो गयी। मेरे पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ दोसà¥à¤¤ हैं, बड़े बेतकलà¥à¤²à¥à¥ž और मनचले। आगरे में मकान है, अचà¥à¤›à¥‡ कवि हैं। उनके कवि-समाज में कई बार शरीक हो चà¥à¤•ा हूà¤à¥¤ à¤à¤¸à¤¾ कविता का उपासक मैंने नहीं देखा। पेशा तो वकालत; पर डूबे रहते हैं कावà¥à¤¯-चिंतन में। आदमी ज़हीन हैं, मà¥à¥˜à¤¦à¤®à¤¾ सामने आया और उसकी तह तक पहà¥à¤à¤š गये; इसलिठकà¤à¥€-कà¤à¥€ मà¥à¥˜à¤¦à¤®à¥‡ मिल जाते हैं,लेकिन कचहरी के बाहर अदालत या मà¥à¥˜à¤¦à¤®à¥‡ की चरà¥à¤šà¤¾ उनके लिठनिषिदà¥à¤§ है। अदालत की चारदीवारी के अनà¥à¤¦à¤° चार-पाà¤à¤š घंटे वह वकील होते हैं।
चारदीवारी के बाहर निकलते ही कवि हैं सिर से पाà¤à¤µ तक। जब देखिये, कवि-मणà¥à¤¡à¤² जमा है, कवि-चरà¥à¤šà¤¾ हो रही है, रचनाà¤à¤ सà¥à¤¨ रहे हैं। मसà¥à¤¤ हो-होकर à¤à¥‚म रहे हैं, और अपनी रचना सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ समय तो उन पर à¤à¤• तलà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¤à¤¾-सी छा जाती है। कणà¥à¤ सà¥à¤µà¤° à¤à¥€ इतना मधà¥à¤° है कि उनके पद बाण की तरह सीधे कलेजे में उतर जाते हैं। अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® में माधà¥à¤°à¥à¤¯ की सृषà¥à¤Ÿà¤¿ करना, निरà¥à¤—à¥à¤£ में सगà¥à¤£ की बहार दिखाना उनकी रचनाओं की विशेषता है। वह जब लखनऊ आते हैं, मà¥à¤à¥‡ पहले सूचना दे दिया करते हैं। आज उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अनायास लखनऊ में देखकर मà¥à¤à¥‡ आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ हà¥à¤† आप यहाठकैसे ? कà¥à¤¶à¤² तो है ? मà¥à¤à¥‡ आने की सूचना तक न दी। बोले à¤à¤¾à¤ˆà¤œà¤¾à¤¨, à¤à¤• जंजाल में फà¤à¤¸ गया हूà¤à¥¤ आपको सूचित करने का समय न था। फिर आपके घर को मैं अपना घर समà¤à¤¤à¤¾ हूà¤à¥¤ इस तकलà¥à¤²à¥à¥ž की कà¥à¤¯à¤¾ ज़रूरत है कि आप मेरे लिठकोई विशेष पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ करें। मैं à¤à¤• ज़रूरी मà¥à¤†à¤®à¤²à¥‡ में आपको कषà¥à¤Ÿ देने आया हूà¤à¥¤ इस वकà¥à¤¤ की सैर को सà¥à¤¥à¤—ित कीजिठऔर चलकर मेरी विपतà¥à¤¤à¤¿-कथा सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡à¥¤
मैंने घबड़ाकर कहा आपने तो मà¥à¤à¥‡ चिनà¥à¤¤à¤¾ में डाल दिया। आप और विपतà¥à¤¤à¤¿-कथा ! मेरे तो पà¥à¤°à¤¾à¤£ सूखे जाते हैं।
'घर चलिà¤, चितà¥à¤¤ शानà¥à¤¤ हो तो सà¥à¤¨à¤¾à¤Šà¤ !'
'बाल-बचà¥à¤šà¥‡ तो अचà¥à¤›à¥€ तरह हैं ?'
'हाà¤, सब अचà¥à¤›à¥€ तरह हैं। वैसी कोई बात नहीं है !'
'तो चलिà¤, रेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤‚ में कà¥à¤› जलपान तो कर लीजिà¤à¥¤'
'नहीं à¤à¤¾à¤ˆ, इस वकà¥à¤¤ मà¥à¤à¥‡ जलपान नहीं सूà¤à¤¤à¤¾à¥¤'
हम दोनों घर की ओर चले। घर पहà¥à¤à¤šà¤•र उनका हाथ-मà¥à¤à¤¹ धà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾, शरबत पिलाया। इलायची-पान खाकर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी विपतà¥à¤¤à¤¿-कथा सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥€ शà¥à¤°à¥‚ की--
'कà¥à¤¸à¥à¤® के विवाह में आप गये ही थे। उसके पहले à¤à¥€ आपने उसे देखा था। मेरा विचार है कि किसी सरल पà¥à¤°à¤•ृति के यà¥à¤µà¤• को आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने के लिठजिन गà¥à¤£à¥‹à¤‚ की ज़रूरत है, वह सब उसमें मौजूद हैं। आपका कà¥à¤¯à¤¾ ख़याल है ?'
मैंने ततà¥à¤ªà¤°à¤¤à¤¾ से कहा, मैं आपसे कहीं जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कà¥à¤¸à¥à¤® का पà¥à¤°à¤¶à¤‚सक हूà¤à¥¤ à¤à¤¸à¥€ लजà¥à¤œà¤¾à¤¶à¥€à¤², सà¥à¤˜à¥œ, सलीक़ेदार और विनोदिनी बालिका मैंने दूसरी नहीं देखी।
Mansarovar - Part 2 (Hindi)
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Book Details
Author(s)Premchand
PublisherSai ePublications
ISBN / ASINB00NI5CAXO
ISBN-13978B00NI5CAX7
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MarketplaceUnited States 🇺🇸