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मैं मृत्यु सिखाता हूँ - Main Mrityu Sikhata Hun (Hindi Edition)

Author Osho .
Publisher OSHO Media International
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Book Details
Author(s)Osho .
ISBN / ASINB07BMCKKZT
ISBN-13978B07BMCKKZ1
Sales Rank2,540,705
MarketplaceUnited States 🇺🇸

Description

"समाधि में साधक मरता है स्वयं, और चूंकि वह स्वयं मृत्यु में प्रवेश करता है, वह जान लेता है इस सत्य को कि मैं हूं अलग, शरीर है अलग। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, और जीवन का अनुभव शुरू हो गया। मृत्यु की समाप्ति और जीवन का अनुभव एक ही सीमा पर होते हैं, एक ही साथ होते हैं। जीवन को जाना कि मृत्यु गई, मृत्यु को जाना कि जीवन हुआ। अगर ठीक से समझें तो ये एक ही चीज को कहने के दो ढंग हैं। ये एक ही दिशा में इंगित करने वाले दो इशारे हैं।"—ओशो

मृत्यु से अमृत की ओर ले चलने वाली इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:
* मृत्यु और मृत्यु-पार के रहस्य
* सजग मृत्यु के प्रयोग
* निद्रा, स्वप्न, सम्मोहन व मूर्च्छा के पार — जागृति
* सूक्ष्म शरीर, ध्यान व तंत्र-साधना के गुप्त आयाम

अनुक्रम
#1: ध्याआयोजित मृत्यु अर्थात न और समाधि के प्रायोगिक रहस्य
#2: आध्यात्मिक विश्व आंदोलन—ताकि कुछ व्यक्ति प्रबुद्ध हो सकें
#3: जीवन के मंदिर में द्वार है मृत्यु का
#4: सजग मृत्यु और जाति-स्मरण के रहस्यों में प्रवेश
#5: स्व है द्वार—सर्व का
#6: निद्रा, स्वप्न, सम्मोहन और मूर्च्छा से जागृति की ओर
#7: मूर्च्छा में मृत्यु है और जागृति में जीवन
#8: विचार नहीं, वरन् मृत्यु के तथ्य का दर्शन
#9: मैं मृत्यु सिखाता हूं
#10: अंधकार से आलोक और मूर्च्छा से परम जागरण की ओर
#11: संकल्पवान—हो जाता है आत्मवान
#12: नाटकीय जीवन के प्रति साक्षी चेतना का जागरण
#13: सूक्ष्म शरीर, ध्यान-साधना एवं तंत्र-साधना के कुछ गुप्त आयाम
#14: धर्म की महायात्रा में स्वयं को दांव पर लगाने का साहस
#15: संकल्प से साक्षी और साक्षी से आगे तथाता की परम उपलब्धि

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