लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ शायर और उनकी शायरी -नज़ीर अकबराबादी (Lokpriya Shayar Aur Unki Shayari-Nazir Akbaraabadi)
Description
उरà¥à¤¦à¥‚लिपि न जानने वाले लेकिन शायरी को पसंद करने वाले अनगिनत लोगों के लिठयह à¤à¤• बडी नियामत साबित हà¥à¤† और सà¤à¥€ ने इससे बहà¥à¤¤ लाठउठाया। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° संकलन उरà¥à¤¦à¥‚ के सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• पà¥à¤°à¤•ाश पंडित ने किये है । उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने शायर के समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ लेखन से चयन किया है और कठिन शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के अरà¥à¤¥ साथ ही दे दिये हैं । इसी के साथ, शायर के जीवन और कारà¥à¤¯ पर-जिनमें से समकालीन उनके परिचित ही थे-बहà¥à¤¤ रोचक ओर चà¥à¤Ÿà¥€à¤²à¥€ à¤à¥‚मिकाà¤à¤ लिखी हैं । ये बोलती तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ में जो सोने में सà¥à¤¹à¤¾à¤—े का काम करती है । नजीर अकबराबादी की शायरी से पता चलता है कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जीवन-रूपी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¥€ तरह किया है । à¤à¤¾à¤·à¤¾ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° से à¤à¥€ वे उदार है, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी शायरी में जन-संरकृति का, जिसमें हिनà¥à¤¦à¥‚ संसà¥à¤•ृति à¤à¥€ शामिल है, दिगà¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ कराया है और हिनà¥à¤¦à¥€ के शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ से परहेज नहीं जिया है ।......
