Lok Vyavahar
Book Details
Description
अनुक्रम
पुस्तक-परिचय-5
1. आलोचना से बचें, इससे सुधार नहीं होता-13
2. सच्ची तारीफ करें और कामयाबी को चूमें-28
3. सामनेवाले की बातों को महत्त्व देना सीखें-42
4. गरमजोशी से स्वागत करें और सच्ची दिलचस्पी जगाएँ-61
5. मुसकान बिखेरें और अपना बनाएँ-71
6. नाम में बहुत कुछ रखा है-79
7. धैर्य के साथ दिलचस्पी से लोगों को सुनें-88
8. मनपसंद बातों से मन जीतें-98
9. तारीफ का प्रयोग जादुई छड़ी की तरह करें-103
10. बहस छोड़ें और लोगों को बोलने दें-115
11. अपनी कमियों को खुले दिल से स्वीकारना सीखें-122
12. पराजय से निकालें विजय का सूत्र-133
13. विरोधियों को पक्षधर बनाना कितना आसान-141
14. 'नहीं' को 'हाँ' में बदलने के प्रयोग-149
15. ज्यादा बोलने से नहीं, सुनने से बात बनती है-154
16. सहयोग पाने के लिए सहयोग करना जरूरी-163
17. नाटकीयता की व्यावहारिकता को समझें-177
18. गलतियाँ निकालने से पहले अच्छाइयाँ गिनाएँ-184
19. आदेश से अधिक कारगर होती है सलाह-193
20. बदलाव मुश्किल है, नामुमकिन नहीं-207




