करà¥à¤®à¤¯à¥‹à¤— (KARMAYOGA)
Book Details
PublisherPrabhat Prakashan
ISBN / ASIN9384343013
ISBN-139789384343019
MarketplaceFrance 🇫🇷
Description
करà¥à¤® शबà¥à¤¦ 'कृ' धातॠसे निकला है; 'कृ' धातॠका अरà¥à¤¥ है-करना। जो कà¥à¤› किया जाता है, वही करà¥à¤® है। करà¥à¤®à¤¯à¥‹à¤— में करà¥à¤® शबà¥à¤¦ से हमारा मतलब केवल कारà¥à¤¯ ही है। मानवजाति का चरम लकà¥à¤·à¥à¤¯ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤²à¤¾à¤ है। मनà¥à¤·à¥à¤¯ का अंतिम धà¥à¤¯à¥‡à¤¯ सà¥à¤– नहीं वरनॠजà¥à¤žà¤¾à¤¨ है; कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤– और आनंद का तो à¤à¤• न à¤à¤• दिन अंत हो ही जाता है। अतः यह मान लेना कि सà¥à¤– ही चरम लकà¥à¤·à¥à¤¯ है, मनà¥à¤·à¥à¤¯ की à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¥‚ल है। संसार में सब दà¥à¤ƒà¤–ों का मूल यही है कि मनà¥à¤·à¥à¤¯ अजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤¶ यह समठबैठता है कि सà¥à¤– ही उसका चरम लकà¥à¤·à¥à¤¯ है। पर कà¥à¤› समय के बाद मनà¥à¤·à¥à¤¯ को यह बोध होता है कि जिसकी ओर वह जा रहा है, वह सà¥à¤– नहीं वरनॠजà¥à¤žà¤¾à¤¨ है, तथा सà¥à¤– और दà¥à¤ƒà¤– दोनों ही महानॠशिकà¥à¤·à¤• हैं, और जितनी शिकà¥à¤·à¤¾ उसे सà¥à¤– से मिलती है, उतनी ही दà¥à¤ƒà¤– से à¤à¥€à¥¤ सà¥à¤– और दà¥à¤ƒà¤– जà¥à¤¯à¥‹à¤‚-जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ आतà¥à¤®à¤¾ पर से होकर जाते रहते हैं, तà¥à¤¯à¥‹à¤‚-तà¥à¤¯à¥‹à¤‚ वे उसके ऊपर अनेक पà¥à¤°à¤•ार के चितà¥à¤° अंकित करते जाते हैं।

