⭐ Ratings & Reviews
No reviews yet — be the first!
No reviews yet.
📖 Description
बिहार के इतिहास को, बुद्ध और महावीर के शांति सन्देशों के अलावा, सामाजिक संरचना में डार्विन जस्टिस की थ्योरी को भी समझना था। सामाजिक संरचना में सदियों से चला आ रहा असंतुलन, संतुलित होने के नाम पर रक्तरंजित होने जा रहा था। तैयारियाँ शुरू हो गर्इं। लोग दूर-दराज़ से आने लगे। जिन्हें अपने खेतों से झंडे उखड़वाने थे, वे मनचाहा योगदान देने को तैयार थे। अनय और चश्मिश की कहानी, काल के किसी कार्यक्रम का हिस्सा है; किसी इंसान के बहाने इंसानियत को कंलकित करना है। उसे कार्ल माक्र्स के अंदर डार्विन के सिद्धान्त को समझाना है। उसे समझाना है कि, न्यूटन का सिद्धान्त सिर्फ भौतिक विज्ञान की किताबों में ही नहीं है, बल्कि वह सामाजिक संरचना के अंदर भी घुसा हुआ है; उसे समझाना है कि, लिंकन के जिस प्रजातंत्र का हम दम्भ भरते हैं, वहाँ भी डार्विन की थ्योरी चुपचाप अपना काम करती रहती है।