Jinnah: Bharat Vibhajan Ke Aine Mein
Book Details
Author(s)Jaswant Singh
ISBN / ASINB007CG8XTU
ISBN-13978B007CG8XT1
Sales Rank3,847,601
MarketplaceUnited States 🇺🇸
Description
1947 में à¤à¤¾à¤°à¤¤ का विà¤à¤¾à¤œà¤¨ बीसवीं सदी की सबसे
दà¥à¤–ांत घटना थी, जिसके जखन अà¤à¥€ तक नहीं à¤à¤°à¥‡ ।
इसके कारण चार पीढियों की मानसिकता आहत
हà¥à¤ˆà¤‚। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हà¥à¤† यह बंटबारा? रà¥à¤•ान इसके लिà¤
उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¾ थे-जिनà¥à¤¤à¤¾, बनंपà¥à¤°à¤¿à¤¸ पारà¥à¤Ÿà¥€ अथबा अंगà¥à¤°à¥‡à¥›?
इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के लेखक जसवंत सिह ने इसका उतà¥à¤¤à¤°
खोजने की कोशिश को है-संà¤à¤µà¤¤: कोई निशà¥à¤šà¤¿à¤¤
उतà¥à¤¤à¤° हो नहीं सकता, फिर à¤à¥€ अपनी ओर से पा
ईमानदारी है रà¥à¤–ाज़ की है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जिला जो रà¥à¤—ीकपà¥à¤¤à¥€
समय हिनà¥à¤¦à¥‚-मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® à¤à¤•ला के पैरोकार थे केसे à¤à¤¾à¤°à¤¤
में मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के à¤à¤•मातà¥à¤° पà¥à¤°à¤µà¤•à¥à¤¤à¤¾ बने और अता:
पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ और फिर क़बà¥à¤¬à¤¯à¤¦à¥‡-कà¥à¤·à¤¾à¥›à¤® । इस
परिवरà¥à¤¤à¤¨ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ केसे हà¥à¤ˆ?
'मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® à¤à¤• अलग राषà¥à¤Ÿà¥à¤° हैं' यह पà¥à¤°à¤¶à¥à¤š कब और
केसे उà¤à¤°à¤¾ और किस तरह à¤à¤¾à¤¯à¤¾ के विà¤à¤¾à¤œà¤¨ में
इसकी परिणति हà¥à¤ˆà¥¤ पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ कà¥à¤°à¥‹ यह विà¤à¤¾à¤œà¤¨
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पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ वया है?










