काम यानी सेक्स भारतीय मान्यता के अनुसार चार पुरुषार्थो में से एक है. काम को प्राचीन मनीषियों ने देव मन है, दैत्य अथवा शैतान नहीं. काम का ज्ञान सदैव अनिवार्य रहा है एवं रहेगा, अल्प अथवा विकृत यौन ज्ञान जीवन सुख से वंचित करने के साथसाथ जीवन विनाश का भी कारण बनता है. यौन विज्ञान के विषय में प्राचीन भारत का दृष्टिकोण महर्षि वात्स्यायनकृत 'कामसूत्र' से स्पष्ट हो सकता है. शिस्ट शैली एवं सरल भाषा में 'कामसूत्र' का यह अनुवाद यौन ज्ञान के लिए सर्वथा पर्याप्त है. स्थानस्थान पर आधुनिक मान्यता के अनुसार विस्तृत टिप्पणियाँ भी दी गई हैं.