Bharat Yatra: Teerth Avm Darshniya Sthal (Hindi)
Book Details
Author(s)Dr. Usha Arora
PublisherSai ePublications
ISBN / ASINB00CGMCT5Y
ISBN-13978B00CGMCT57
MarketplaceFrance 🇫🇷
Description
Language: Hindi
(Note: This eBook is in Hindi Language and will rendered on Kindle Reader for PC, Kindle Fire, Kindle Fire HD).
लेखिका का यह पहला संगà¥à¤°à¤¹ परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ का à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ इंदà¥à¤°à¤§à¤¨à¥à¤· बनाता है जिसमें इतनी छटाà¤à¤ हैं कि परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• के मन का रोमरोम सिहर उठता है और कदम बढ़ते ही जाते हैं। à¤à¤¾à¤—ती जिंदगी से ऊबे और थके मनà¥à¤·à¥à¤¯ के लिये आशा है यह संगà¥à¤°à¤¹ उसकी जड़ता को मिटाकर उसे संवेदनशील बना देगा। हर सà¥à¤¥à¤² के इतिहास, वासà¥à¤¤à¥à¤•ला के साथ लेखिका ने अपनी अनà¥à¤à¥‚तियों को इस तरह पिरोया है कि हर सà¥à¤¥à¤² जीवंत हो उठा है। सà¥à¤¥à¤² तक पहà¥à¤‚चने का मारà¥à¤— और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ जानकारी à¤à¥€ यथासंà¤à¤µ देने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है। जिससे परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों को परेशानी का सामना ना करना पड़े। लेख अपनी सारी अनगढ़ता के बाबजूद सहस और संपà¥à¤°à¥‡à¤·à¤£à¥€à¤¯ है।
साà¤à¤ˆ ईपबà¥à¤²à¤¿à¤•ेशन
माता का बà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¾ है
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के करोड़ों शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं की आसà¥à¤¥à¤¾ का दरबार है वैषà¥à¤£à¥‹à¤‚ देवी का मंदिर। à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को शांति और कामनाओं की पूरà¥à¤¤à¤¿ करने वाली मां मनोहारी तà¥à¤°à¤¿à¤•ूट परà¥à¤µà¤¤à¤®à¤¾à¤²à¤¾ के अंचल में अवसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। इस धरà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ को पà¥à¤°à¤•ृति ने सà¥à¤µà¤‚य अपने हाथों से रचा है। इस धरà¥à¤® सà¥à¤¥à¤² की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ कब और कैसे हà¥à¤ˆ कोई सही जानकारी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं है फिर à¤à¥€ इस गà¥à¤«à¤¾ के बारे में कई कथाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ है। à¤à¤• पौराणिक कथा बताती है कि वैषà¥à¤£à¥‹à¤‚ देवी à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ की परम à¤à¤•à¥à¤¤ à¤à¤µà¤‚ उपासक थीं और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कौमारà¥à¤¯à¤µà¥à¤°à¤¤ घारण किया हà¥à¤† था। जब ये कà¥à¤› बड़ी हà¥à¤ˆ तो à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ नामक à¤à¤• तांतà¥à¤°à¤¿à¤• उनकी ओर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ हो गया, जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· देखने का अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¥€ था। अपनी अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤· को पूरा करने के लिये उसने अपनी तंतà¥à¤° शकà¥à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया और देखा देवी तà¥à¤°à¤¿à¤•ूट परà¥à¤µà¤¤ की ओर जा रही हैं। तांतà¥à¤°à¤¿à¤• ने उनका पीछा किया। कहा जाता है कि बाण गंगा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर जब माता को पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगी तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने धरती को अपने बाण से बेध डाला और वहां से जल की धारा निकल पड़ी। यह à¤à¥€ कहा जाता है कि चरण पादà¥à¤•ा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ का नाम इसलिठपड़ा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वहां पर देवी ने विशà¥à¤°à¤¾à¤® किया तथा उनके पद चिनà¥à¤¹ वहां आज à¤à¥€ हैं। यही पौराणिक कथा आगे कहती है कि माता आदिकà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ नामक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक गà¥à¤«à¤¾ मे तपसà¥à¤¯à¤¾ करने हेतॠलीन हो गयीं लेकिन à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ ने यहां à¤à¥€ पीछा नहीं छोड़ा। जिस गà¥à¤«à¤¾ में माता ने शरण ली थी उसका नाम गरà¥à¤ जून पड़ गया। वह वहां à¤à¥€ आ पहà¥à¤‚चा। कहा जाता है माता अपने आप को बचाती हà¥à¤ˆ दरबार सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पवितà¥à¤° गà¥à¤«à¤¾ की ओर अगà¥à¤°à¤¸à¤° हà¥à¤ˆà¥¤ यहां आकर माता ने महाकाली का रूप धारण किया और अपने तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल के पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° से à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ का धड़ काटकर इतने वेग से फेंका कि वह दूर पहाड़ पर जा गिरा। जिस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर गिरा वहां आज à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚ का मंदिर है। कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गà¥à¤«à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤° पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ चहान असल में à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ का धड़ है जो पाषाण बन गया था। मां ने à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ को उसके अंतिम समय में कà¥à¤·à¤®à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की और यह वरदान दिया कि आने वाले समय में जो à¤à¥€ à¤à¤•à¥à¤¤ माता के दरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥ आयेगा उसकी यातà¥à¤°à¤¾ तà¤à¥€ पूरी मानी जायेगी जब वह वापसी पर à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¶à¤¨ करेगा।
1. माता का बà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¾ है-
2. चैत में चलिये माठपूरà¥à¤£à¤¾à¤—िरी के दरबार
3. आसà¥à¤¥à¤¾ का धाम सिदà¥à¤§à¤ªà¥€à¤ बेलौन माà¤
4. आसà¥à¤¥à¤¾ का धाम केलादेवी
5. पिघलती बरà¥à¤« गहराती आसà¥à¤¥à¤¾
6. सागरों का मिलन कनà¥à¤¯à¤¾à¤•à¥à¤®à¤¾à¤°à¥€
7. तपà¥à¤¤ धरा का शीतल सौनà¥à¤¦à¤°à¥à¤¯ - मसूरी
8. बार बार जायेंगे - मनोहारी ऊटी
9. अनà¥à¤ªà¤® कोडैकानाल
10. चलिठमंदिरों की नगरी पालिताना
11. परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• बार बार याद करता है - जगनà¥à¤¨à¤¾à¤¥à¤ªà¥à¤°à¥€
12. पवितà¥à¤° धाम दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¿à¤•ा
13. जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग का आराधना सà¥à¤¥à¤² - रामेशà¥à¤°à¥à¤µà¤°à¤®
14. देवसà¥à¤¥à¤²à¥€ सोमनाथ मंदिर
15. पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ पर उकेरी कला - रणकपà¥à¤° के मंदिर
16. गोआ के मंदिर
17. लहरों पर बà¥à¤¨à¤¤à¤¾ लहरिया गोआ
18. बेमिसाल गिरजाघर
19. à¤à¤²à¤¿à¤«à¥‡à¤‚टा की गà¥à¤«à¤¾à¤
(Note: This eBook is in Hindi Language and will rendered on Kindle Reader for PC, Kindle Fire, Kindle Fire HD).
लेखिका का यह पहला संगà¥à¤°à¤¹ परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ का à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ इंदà¥à¤°à¤§à¤¨à¥à¤· बनाता है जिसमें इतनी छटाà¤à¤ हैं कि परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• के मन का रोमरोम सिहर उठता है और कदम बढ़ते ही जाते हैं। à¤à¤¾à¤—ती जिंदगी से ऊबे और थके मनà¥à¤·à¥à¤¯ के लिये आशा है यह संगà¥à¤°à¤¹ उसकी जड़ता को मिटाकर उसे संवेदनशील बना देगा। हर सà¥à¤¥à¤² के इतिहास, वासà¥à¤¤à¥à¤•ला के साथ लेखिका ने अपनी अनà¥à¤à¥‚तियों को इस तरह पिरोया है कि हर सà¥à¤¥à¤² जीवंत हो उठा है। सà¥à¤¥à¤² तक पहà¥à¤‚चने का मारà¥à¤— और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ जानकारी à¤à¥€ यथासंà¤à¤µ देने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है। जिससे परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों को परेशानी का सामना ना करना पड़े। लेख अपनी सारी अनगढ़ता के बाबजूद सहस और संपà¥à¤°à¥‡à¤·à¤£à¥€à¤¯ है।
साà¤à¤ˆ ईपबà¥à¤²à¤¿à¤•ेशन
माता का बà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¾ है
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के करोड़ों शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं की आसà¥à¤¥à¤¾ का दरबार है वैषà¥à¤£à¥‹à¤‚ देवी का मंदिर। à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को शांति और कामनाओं की पूरà¥à¤¤à¤¿ करने वाली मां मनोहारी तà¥à¤°à¤¿à¤•ूट परà¥à¤µà¤¤à¤®à¤¾à¤²à¤¾ के अंचल में अवसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। इस धरà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ को पà¥à¤°à¤•ृति ने सà¥à¤µà¤‚य अपने हाथों से रचा है। इस धरà¥à¤® सà¥à¤¥à¤² की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ कब और कैसे हà¥à¤ˆ कोई सही जानकारी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं है फिर à¤à¥€ इस गà¥à¤«à¤¾ के बारे में कई कथाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ है। à¤à¤• पौराणिक कथा बताती है कि वैषà¥à¤£à¥‹à¤‚ देवी à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ की परम à¤à¤•à¥à¤¤ à¤à¤µà¤‚ उपासक थीं और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कौमारà¥à¤¯à¤µà¥à¤°à¤¤ घारण किया हà¥à¤† था। जब ये कà¥à¤› बड़ी हà¥à¤ˆ तो à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ नामक à¤à¤• तांतà¥à¤°à¤¿à¤• उनकी ओर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ हो गया, जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· देखने का अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¥€ था। अपनी अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤· को पूरा करने के लिये उसने अपनी तंतà¥à¤° शकà¥à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया और देखा देवी तà¥à¤°à¤¿à¤•ूट परà¥à¤µà¤¤ की ओर जा रही हैं। तांतà¥à¤°à¤¿à¤• ने उनका पीछा किया। कहा जाता है कि बाण गंगा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर जब माता को पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगी तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने धरती को अपने बाण से बेध डाला और वहां से जल की धारा निकल पड़ी। यह à¤à¥€ कहा जाता है कि चरण पादà¥à¤•ा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ का नाम इसलिठपड़ा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वहां पर देवी ने विशà¥à¤°à¤¾à¤® किया तथा उनके पद चिनà¥à¤¹ वहां आज à¤à¥€ हैं। यही पौराणिक कथा आगे कहती है कि माता आदिकà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ नामक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक गà¥à¤«à¤¾ मे तपसà¥à¤¯à¤¾ करने हेतॠलीन हो गयीं लेकिन à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ ने यहां à¤à¥€ पीछा नहीं छोड़ा। जिस गà¥à¤«à¤¾ में माता ने शरण ली थी उसका नाम गरà¥à¤ जून पड़ गया। वह वहां à¤à¥€ आ पहà¥à¤‚चा। कहा जाता है माता अपने आप को बचाती हà¥à¤ˆ दरबार सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पवितà¥à¤° गà¥à¤«à¤¾ की ओर अगà¥à¤°à¤¸à¤° हà¥à¤ˆà¥¤ यहां आकर माता ने महाकाली का रूप धारण किया और अपने तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल के पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° से à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ का धड़ काटकर इतने वेग से फेंका कि वह दूर पहाड़ पर जा गिरा। जिस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर गिरा वहां आज à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚ का मंदिर है। कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गà¥à¤«à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤° पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ चहान असल में à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ का धड़ है जो पाषाण बन गया था। मां ने à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚नाथ को उसके अंतिम समय में कà¥à¤·à¤®à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की और यह वरदान दिया कि आने वाले समय में जो à¤à¥€ à¤à¤•à¥à¤¤ माता के दरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥ आयेगा उसकी यातà¥à¤°à¤¾ तà¤à¥€ पूरी मानी जायेगी जब वह वापसी पर à¤à¥ˆà¤°à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¶à¤¨ करेगा।
1. माता का बà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¾ है-
2. चैत में चलिये माठपूरà¥à¤£à¤¾à¤—िरी के दरबार
3. आसà¥à¤¥à¤¾ का धाम सिदà¥à¤§à¤ªà¥€à¤ बेलौन माà¤
4. आसà¥à¤¥à¤¾ का धाम केलादेवी
5. पिघलती बरà¥à¤« गहराती आसà¥à¤¥à¤¾
6. सागरों का मिलन कनà¥à¤¯à¤¾à¤•à¥à¤®à¤¾à¤°à¥€
7. तपà¥à¤¤ धरा का शीतल सौनà¥à¤¦à¤°à¥à¤¯ - मसूरी
8. बार बार जायेंगे - मनोहारी ऊटी
9. अनà¥à¤ªà¤® कोडैकानाल
10. चलिठमंदिरों की नगरी पालिताना
11. परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• बार बार याद करता है - जगनà¥à¤¨à¤¾à¤¥à¤ªà¥à¤°à¥€
12. पवितà¥à¤° धाम दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¿à¤•ा
13. जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग का आराधना सà¥à¤¥à¤² - रामेशà¥à¤°à¥à¤µà¤°à¤®
14. देवसà¥à¤¥à¤²à¥€ सोमनाथ मंदिर
15. पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ पर उकेरी कला - रणकपà¥à¤° के मंदिर
16. गोआ के मंदिर
17. लहरों पर बà¥à¤¨à¤¤à¤¾ लहरिया गोआ
18. बेमिसाल गिरजाघर
19. à¤à¤²à¤¿à¤«à¥‡à¤‚टा की गà¥à¤«à¤¾à¤
