à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤— (Hindi Self-help): Bhaktiyog (Hindi Self-help)
Book Details
PublisherBhartiya Sahitya Inc.
ISBN / ASINB00JDV9LF2
ISBN-13978B00JDV9LF5
MarketplaceGermany 🇩🇪
Description
जब पà¥à¤°à¥‡à¤® का यह उचà¥à¤šà¤¤à¤® आदरà¥à¤¶ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो जाता है, तो जà¥à¤žà¤¾à¤¨ फिर न जाने कहाठचला जाता है। तब à¤à¤²à¤¾ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की इचà¥à¤›à¤¾ à¤à¥€ कौन करे? तब तो मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿, उदà¥à¤§à¤¾à¤°, निरà¥à¤µà¤¾à¤£ की बातें न जाने कहाठगायब हो जाती हैं। इस दैवी पà¥à¤°à¥‡à¤® में छके रहने से फिर à¤à¤²à¤¾ कौन मà¥à¤•à¥à¤¤ होना चाहेगा? ''पà¥à¤°à¤à¥‹! मà¥à¤à¥‡ धन, जन, सौनà¥à¤¦à¤°à¥à¤¯, विदà¥à¤¯à¤¾, यहाठतक कि मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ नहीं चाहिà¤à¥¤ बस इतनी ही साध है कि जनà¥à¤® जनà¥à¤® में तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मेरी अहैतà¥à¤•ी à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ बनी रहे।'' à¤à¤•à¥à¤¤ कहता है, ''मैं शकà¥à¤•र हो जाना नहीं चाहता, मà¥à¤à¥‡ तो शकà¥à¤•र खाना अचà¥à¤›à¤¾ लगता है।'' तब à¤à¤²à¤¾ कौन मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाने की इचà¥à¤›à¤¾ करेगा? कौन à¤à¤—वान के साथ à¤à¤• हो जाने की कामना करेगा? à¤à¤•à¥à¤¤ कहता है, ''मैं जानता हूठकि वे और मैं दोनों à¤à¤• हैं, पर तो à¤à¥€ मैं उनसे अपने को अलग रखकर उन पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤® का समà¥à¤à¥‹à¤— करूà¤à¤—ा।'' पà¥à¤°à¥‡à¤® के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤® - यही à¤à¤•à¥à¤¤ का सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š सà¥à¤– है।





