घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ विà¤à¥‚ति है? इसीलिठकि उसीने आज की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को बनाया है। यदि आदिम-पà¥à¤°à¥‚ष à¤à¤• जगह नदी या तालाब के किनारे गरà¥à¤® मà¥à¤²à¥à¤• में पड़े रहते, तो वह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को आगे नहीं ले जा सकते थे। आदमी की घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ी ने बहà¥à¤¤ बार खून की नदियाठबहाई हैं, इसमें संदेह नहीं, और घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ों से हम हरà¥à¤—िज नहीं चाहेंगे कि वह खून के रासà¥à¤¤à¥‡ को पकड़ें, किंतॠअगर घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ों के काफिले न आते-जाते, तो समसà¥à¤¤ मानव-जातियाठसो जातीं और पशॠसे ऊपर नहीं उठपातीं। आदिम घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ों में से आरà¥à¤¯à¥‹à¤‚, शकों, हूणों ने कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ किया, अपने खूनी पथों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मानवता के पथ को किस तरह पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ किया, इसे इतिहास में हम उतना सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ नहीं पाते, किंतॠमंगोल-घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ों की करामातों को तो हम अचà¥à¤›à¥€ तरह जानते हैं। बारूद, तोप, कागज, छापाखाना, दिगà¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤•, चशà¥à¤®à¤¾ यही चीजें थीं, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पशà¥à¤šà¤¿à¤® में विजà¥à¤žà¤¾à¤¨-यà¥à¤— का आरंठकराया और इन चीजों को वहाठले जाने वाले मंगोल घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ थे।