Main Vivekanand Bol Raha Hoon (Hindi)
Book Details
Author(s)Giriraj Sharan Agrawal
PublisherPrabhat Prakashan
ISBN / ASINB00M4P6OTA
ISBN-13978B00M4P6OT2
Sales Rank99,999,999
MarketplaceUnited States 🇺🇸
Description
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• चेतना के सिरमौर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विवेकानंद अदà¥à¤à¥à¤¤ मेधा के सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा था कि सारे अनरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की जड़ है हमारी गरीबी। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ दरिदà¥à¤°à¤¨à¤¾à¤°à¤¾à¤¯à¤£ के दà¥à¤–ों से दà¥à¤°à¤µà¤¿à¤¤ और दलितवरà¥à¤— के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किठजानेवाले अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ से वà¥à¤¯à¤¥à¤¿à¤¤ थे। वे जाति-पाà¤à¤¤à¤¿ के घोर विरोधी थे और इसे सामाजिक जीवन का घोर कलंक मानते थे। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ का विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ था कि पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• राषà¥à¤Ÿà¥à¤° को अपनी नारी-जाति का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करना चाहिà¤à¥¤ उनकी मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ थी कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सरà¥à¤µà¤¸à¤¾à¤§à¤¾à¤°à¤£ में यदि धरà¥à¤® का संचार हो जाà¤, तो हम छोटी-छोटी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से सहज में ही मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाà¤à¤à¤—े।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ धरà¥à¤®à¤ªà¥à¤°à¥à¤· थे और à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के सजग पà¥à¤°à¤¹à¤°à¥€à¥¤ वे कटà¥à¤Ÿà¤° राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ थे, किंतॠउनका राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ मानवता का पोषक था। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ ने धरà¥à¤® और संसà¥à¤•ृति का निदान करते हà¥à¤ सोठहà¥à¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤ को उसके गौरवशाली अतीत से परिचित कराया। वेदों और उपनिषदों के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ आतà¥à¤®à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨ के संदेश को पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥à¤¯ देशों तक गà¥à¤‚जारित किया।
वेदांत के अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤•, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के विशिषà¥à¤Ÿ उदà¥à¤˜à¥‹à¤·à¤•, मानवता के महानॠपोषक, दूरदरà¥à¤¶à¥€ विचारक सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विवेकानंद के विचार देश की à¤à¤¾à¤µà¥€ यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी के लिठपथ-पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤• का कारà¥à¤¯ करेंगे। इसी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ और शà¥à¤ संकलà¥à¤ª के साथ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ के विचारों का यह संकलन पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ है।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ धरà¥à¤®à¤ªà¥à¤°à¥à¤· थे और à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के सजग पà¥à¤°à¤¹à¤°à¥€à¥¤ वे कटà¥à¤Ÿà¤° राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ थे, किंतॠउनका राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦ मानवता का पोषक था। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ ने धरà¥à¤® और संसà¥à¤•ृति का निदान करते हà¥à¤ सोठहà¥à¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤ को उसके गौरवशाली अतीत से परिचित कराया। वेदों और उपनिषदों के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ आतà¥à¤®à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨ के संदेश को पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥à¤¯ देशों तक गà¥à¤‚जारित किया।
वेदांत के अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤•, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के विशिषà¥à¤Ÿ उदà¥à¤˜à¥‹à¤·à¤•, मानवता के महानॠपोषक, दूरदरà¥à¤¶à¥€ विचारक सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विवेकानंद के विचार देश की à¤à¤¾à¤µà¥€ यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी के लिठपथ-पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤• का कारà¥à¤¯ करेंगे। इसी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ और शà¥à¤ संकलà¥à¤ª के साथ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€à¤œà¥€ के विचारों का यह संकलन पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ है।
