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LAAL FROCK WALI LADKI

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Book Details
Author(s) Mukesh Kumar Sinha
Publisher Bodhi Prakashan
ISBN / ASIN B078WQ61VR
ISBN-13 978B078WQ61V4
Marketplace United Kingdom 🇬🇧
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Description
अभी दो एक साल पहले ही हिन्दी साहित्य को लप्रेक का संक्रमण हुआ तो बहुत से लोग इससे बच न सके। आह वाह के साथ जैसे नई विधा खोज लेने का दावा हवा में तैरने लगा। पर ध्यान से देखने पर लगा कि ये तहरीरें वक्त के बड़े नाजुक अप्रत्यााशित-से मोड़ों, घटनाओं के ऐसे विरल उदाहरण हैं जिनसे हर व्यक्ति रूबरू होता है पर वह उसे दर्ज नहीं करता। रवीश कुमार ने दर्ज किया तो उसे लप्रेक के नाम से जाना गया। लघु प्रेम कहानियां। आज के आपाधापी के जमाने में सफर में वक्त काटने का जरिया आज भी किताबें हो सकती हैं और ऐसी छोटी-छोटी कहानियां जिनमें प्रेम महुए के फूल की तरह आहिस्ता-आहिस्ता टपकता हो। मुकेश कुमार सिन्हा लप्रेक की चपेट में तभी आए थे जब इसकी शोहरत परवान चढ़ रही थी। फिर जि़न्दगी में पीछे मुड़ कर देखा तो अनेक कहानियां उनकी स्मृतियों से लिपट गयीं। वे अधीर हो बैठे। हर कहानी की रील रिबाइंड करते हुए लगा कि ये तो वाकई लप्रेक हैं और इसका संक्रमण आज हर उस युवामन को है जो किशोर हो या अधेड़ ऐसे छुवन से गुजरते हुए लप्रेकग्रस्त हुए बिना नहीं रह सकता। मुकेश की लघु प्रेम कहानियां पढ़ते हुए यह ख्याल पुख्ता हुआ कि यह शख्स जितनी पुरलुत्फ‍अंदाज की कविताएं लिखता है उतनी ही चुंबकीय लघु प्रेम कहानियां। आप सफर में हों, या फुरसत का कुछ वक्त आपके पास हो तो ये कहानियां समय बिताने के काम आ सकती हैं, पर उससे भी आगे ये जीवन को कुछ सीख भी देती हैं। जो हमेशा धीर-गंभीर बने दुनिया को अपनी उदासियों से भरते रहते हैं, उनके लिए ये एक संदेश की तरह हैं कि हँसते-मुस्कराते हुए जिएं और अपने जीवन में प्रेम का एक खाता जरूर खोलें और उसे नियमित रूप से संचालित भी करते रहें, उसे निष्क्रिय न होनें दें। मुकेश की ये कहानियां उन उड़ते हुए रूमालों की तरह हैं, जिन्हें सहृदय स्वीकार की जरूरत है। - ओम निश्चल
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