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📖 Description
झारखंड के प्रकृति का लोक पर्व सरहुल। जिसके नैसर्गिक वातावरण में आदिवासी समुदाय, अपनी संपूर्ण संवेदनाओं, सुखानुभूतियों के साथ सरना स्थली में प्रकृति की उपासना कर अखरा में पारंपरिक लोकगीतों की बहारों में मदमस्त मांदर की थाप और नगाड़ों की गूंज से अभिभूत होकर मस्ती के आलम में मस्त थिरकते लोक नृत्य करते सारी रात खुशियां लुटाने को आतुर है। यही तो है आदिवासियों की संपूर्ण संपदा। जहां खुशियां, निरद्वंद्वता, निश्छलता, सादगी, सरलता और सौहार्द के भंडार संजोए हुए हैं, जो जंगलों पहाड़ों कंदराओं के गोद में बसने वाले इन आदिवासियों को प्रकृति और अपने पुरखों से सौगात स्वरूप सहज ही प्राप्त हुआ है।