Krishnachand ki or (Novel based on childhood of Abdurrahim Khankhana): कृषà¥à¤£à¤šà¤‚द की ओर (अबà¥à¤¦à¥à¤°à¥à¤°à¤¹à¥€à¤® खानखाना के बालà¥à¤¯à¤•ाल पर आधारित उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸) (Hindi
Book Details
Author(s)Dr. Mohan Lal Gupta
PublisherShubhda Prakashan
ISBN / ASINB00XG2UWG6
ISBN-13978B00XG2UWG0
MarketplaceFrance 🇫🇷
Description
खानखाना अबà¥à¤¦à¥à¤°à¥à¤°à¤¹à¥€à¤® अथवा रहीम, अकबर के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ सेनापति à¤à¤µà¤‚ संरकà¥à¤·à¤• बैरामखां का पà¥à¤¤à¥à¤° था। जिस समय बैरामखां की हतà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤ˆ, रहीम केवल पांच साल का था। अकबर ने बैरामखां की दो बेवा बेगमों से विवाह कर लिया तो रहीम à¤à¥€ फतहपà¥à¤° सीकरी के महलों में आ गया और वहीं उसका पालन-पोषण हà¥à¤†à¥¤ इस दौरान उसका समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• अकबर के राजसà¥à¤µ मंतà¥à¤°à¥€ राजा टोडरमल तथा अकबर की कचà¥à¤›à¤µà¤¾à¤¹à¥€ रानी हीराबाई से हà¥à¤†à¥¤ ये दोनों कृषà¥à¤£à¤à¤•à¥à¤¤ थे। यहीं से रहीम के हृदय में शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ का अंकà¥à¤° फूटा। सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से उस समय देश में à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ आंदोलन अपने चरम पर था। इस कारण यह अंकà¥à¤° शीघà¥à¤° ही विशाल वृकà¥à¤· में बदल गया। सूरदास, गà¥à¤¸à¤¾à¤ˆà¤‚ विटà¥à¤ लनाथ, रसखान, गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ आदि नाना संतों से रहीम का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• हà¥à¤† और वह à¤à¥€ शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ का परम à¤à¤•à¥à¤¤ हो गया। इस उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ में रहीम के बालà¥à¤¯à¤•ाल से लेकर यà¥à¤µà¤¾ होने तक की घटनाओं को सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ दिया गया है। 220 पृषà¥à¤ के इस रोचक उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ को à¤à¤• बार पà¥à¤¨à¤¾ आरमà¥à¤ करने के बाद बीच में छोड़ देना अतà¥à¤¯à¤‚त कठिन है।




