Sab Kahu Se Bair: सब काहू से बैर (Hindi Edition)
Book Details
Author(s)Dr. Mohan Lal Gupta
PublisherShubhda Prakashan
ISBN / ASINB00YZUWPIQ
ISBN-13978B00YZUWPI2
MarketplaceFrance 🇫🇷
Description
वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ संगà¥à¤°à¤¹ 'à¤à¤• उलà¥à¤²à¥‚ का सांसà¥à¤•ृतिक चिंतन' की अपार सफलता के बाद 'सब काहू से बैर' डॉ. मोहनलाल गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ का दूसरा वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ संगà¥à¤°à¤¹ था जो वरà¥à¤· 2004 में पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤† था। बरसों तक दैनिक à¤à¤¾à¤¸à¥à¤•र के 'राग दरबारी' कॉलम में हासà¥à¤¯-वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ रचनाà¤à¤‚ लिखने वाले डॉ. मोहनलाल गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ लेखनी की तीखी धार और मीठी मार के लिये जाने जाते हैं।
सब काहू से बैर में डॉ. गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ की 22 हासà¥à¤¯-वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ रचनाà¤à¤‚ संगà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¤ हैं जो देश और काल की तेजी से बदलती-बिगड़ती तसà¥à¤µà¥€à¤° पर करारी चोट करती हैं। घनघोर पूंजीवादी अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की चकाचौंध में मानव मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के अधः पतन को लकà¥à¤·à¥à¤¯ करके लिखे गये ये वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯, पाठक के मन को मौलिक चिंतन के लिये पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करते हैं। आजादी के बाद विकास à¤à¤µà¤‚ आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता की आड़ में जिस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अमरीकीकरण का षड़यंतà¥à¤° रचा गया है, उस षड़यंतà¥à¤° का परà¥à¤¦à¤¾ फाश करने वाले ये वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ तीखी चà¥à¤à¤¨ का अनà¥à¤à¤µ तो कराते हैं किंतॠà¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ साहितà¥à¤¯ लेखन की समृदà¥à¤§ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते हà¥à¤ लेखक ने कड़वी से कड़वी बात को हासà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ की मीठी चाशनी में परोसा है। आप इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• बार पà¥à¤¨à¤¾ आरमà¥à¤ करेंगे तो पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• को पूरी पॠबिना नहीं उठेंगे।
सब काहू से बैर में डॉ. गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ की 22 हासà¥à¤¯-वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ रचनाà¤à¤‚ संगà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¤ हैं जो देश और काल की तेजी से बदलती-बिगड़ती तसà¥à¤µà¥€à¤° पर करारी चोट करती हैं। घनघोर पूंजीवादी अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की चकाचौंध में मानव मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के अधः पतन को लकà¥à¤·à¥à¤¯ करके लिखे गये ये वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯, पाठक के मन को मौलिक चिंतन के लिये पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करते हैं। आजादी के बाद विकास à¤à¤µà¤‚ आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता की आड़ में जिस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अमरीकीकरण का षड़यंतà¥à¤° रचा गया है, उस षड़यंतà¥à¤° का परà¥à¤¦à¤¾ फाश करने वाले ये वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ तीखी चà¥à¤à¤¨ का अनà¥à¤à¤µ तो कराते हैं किंतॠà¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ साहितà¥à¤¯ लेखन की समृदà¥à¤§ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते हà¥à¤ लेखक ने कड़वी से कड़वी बात को हासà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ की मीठी चाशनी में परोसा है। आप इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• बार पà¥à¤¨à¤¾ आरमà¥à¤ करेंगे तो पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• को पूरी पॠबिना नहीं उठेंगे।




